पत्थर हूँ में, तू फूल बना दे मुझको,
मुजरिम हूँ तेरा, जो चाहे सजा दे मुझको!
लफ्ज नहीं निकल पाते हैं, मोहब्बत अब भी बेपनाह है,
तू दरिया है मुझे, समंदर बना खुद से मिला ले मुझको!!@Raj

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